तीसरी लहर का खौफ, आखिर हम डेल्टा प्लस वेरिएंट को कैसे पटखनी देंगे?

डेल्टा प्लस वेरिएंट कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट या बी.1.617.2 का म्यूटेशन है. इसने के417एन स्पाइक म्यूटेशन पर आधिपत्य करके डेल्टा प्लस वेरिएंट बनाया है. भारत के स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस वेरिएंट में दो चिंताजनक बातें देखी गई हैं. पहला कि इसके संक्रमण की रफ्तार ज्यादा है. दूसरी चिंताजनक बात ये है कि ये मोनोक्लोनल एंटीबॉडी इलाज का प्रतिरोध भी कर सकता है. मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी का ट्रायल भारत में हाल ही में हुआ है. कोरोना के माइल्ड और मॉडरेट मरीजों के इलाज में इसे इस्तेमाल किया जाता है.
कितनी प्रभावी होंगी वैक्सीन
अब सवाल ये भी है कि क्या वैक्सीन इस वैरिएंट के खिलाफ काम करेंगी? वैक्सीन को लेकर ये सवाल हर बार तब उठता है जब कोई नया वेरिएंट सामने आता है. इसका कारण ये है कि अभी मौजूद ज्यादातर वैक्सीन कोविड-19 के मूल स्वरूप के लिए बनी हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि संभव है वैक्सीन इस वेरिएंट पर भी काम करें. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि देश में इस्तेमाल की जा रहीं दो प्रमुख वैक्सीन को कोविशील्ड और कोवैक्सीन इस वेरिएंट पर प्रभावी हैं. अभी इसे लेकर और जानकारी का इंतजार किया जा रहा है. आईसीएमआर और नेशनल वायरोलॉजी इंस्टिट्यूट ने कहा है कि वो डेल्टा प्लस वेरिएंट पर वैक्सीन के प्रभाव की स्टडी करेंगे.
विश्व स्वास्थ्य संगठन की भी नजर
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस वेरिएंट को ज्यादा संक्रामक पाया है और इसे लेकर वो एक एडवाइजरी भी जारी करने की सोच रहा है. लेकिन इन सबके बीच एक्सपर्ट्स का कहना है कि डेल्टा प्लस वेरिएंट के खिलाफ भी हमें वही सावधानियां बरतनी होंगी जिन्हें पहले फॉलो किया गया है. मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और हाथ धोने जैसे नियम अब भी प्रभावी रहेंगे.
(KENNETH MOHANTY की स्टोरी से इनपुट्स के साथ.)