क्या डंकी का मांस भी खाता है इंसान; हैदराबाद में बरामद 400 किलो मीट का क्या है राज?

हाइलाइट्स
2019 की पशुधन गणना के अनुसार भारत में गधों की आबादी घटकर 12 लाख हो गई है
भारतीय दंड संहिता की धारा 429 के तहत गधों के वध पर प्रतिबंध है
आंध्र प्रदेश में मान्यता है कि गधे का मांस पीठ दर्द और अस्थमा को ठीक कर सकता है
अमरावती. आंध्र प्रदेश पुलिस ने रविवार की देर रात बापटला शहर में चार अलग-अलग स्थानों से 400 किलोग्राम गधे का मांस जब्त किया है. इतनी बड़ी मात्रा में पकड़ा गया गधे का मीट देश में अपनी तरह की सबसे बड़ी जब्ती मानी जा रही है. 400 किलोग्राम गधे का मांस जब्त करने के साथ ही पुलिस ने मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है. छापेमारी में पुलिस की मदद करने वाले वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने कहा कि आंध्र प्रदेश में गधों को मारने की प्रथा कई साल पुरानी है. आरोपी मांस को 600 रुपये किलो बेच रहे थे.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में व्यापक मान्यता है कि गधे का मांस पीठ दर्द और अस्थमा को ठीक कर सकता है. गधे का यह मीट व्यापक रूप से प्रकाशम, कृष्णा, पश्चिम गोदावरी और गुंटूर जिलों में बेचा और खाया जाता है.
गधे का मीट क्या भारत में है बैन?
भारत में गधे को मारे जाने या मीट बेचने पर पकड़े जाने पर सजा का प्रावधान है. भारतीय दंड संहिता की धारा 429 के तहत गधों के वध पर प्रतिबंध है जिसमें दंड के रूप में पांच साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. ऐसे मामलों में पशु क्रूरता कानून के तहत भी कार्यवाई की जाती है. बरामदगी ऐसे समय हुई है जब देश गधों की आबादी में भारी गिरावट दर्ज की गई है. इसके अलावा, खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के अनुसार गधे के मांस का सेवन अवैध है.
2019 की पशुधन गणना के अनुसार भारत में गधों की आबादी घटकर 12 लाख हो गई, जो 2012 में 32 लाख हुआ करती थी. गिरावट का एक बड़ा कारण चीन में गधे की खाल की मांग को भी माना जाता है.
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FIRST PUBLISHED : October 11, 2022, 10:23 IST