बड़ी खबर: देशभर के इंजीनियरिंग-मैनेजमेंट कॉलेजों में एक समान होगी फीस, ये रही स्लैब

नई दिल्ली. देशभर के इंजीनियरिंग कॉलेजों को लेकर बड़ी खबर आ रही है. इंजीनियरिंग सहित फार्मेसी, आर्किटेक्चर और मैनेजमेंट की पढ़ाई कराने वाले कॉलेज अब छात्रों से मनमाने ढंग से मोटी फीस नहीं वसूल पाएंगे. देशभर में मौजूद सरकारी और निजी कॉलेजों के लिए फीस का ढांचा तय कर दिया गया है. इस संबंध में जल्द ही एआईसीटीई की ओर से नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा.
एआईसीटई के वरिष्ठ अधिकारी की ओर से बताया गया कि इंजीनियरिंग के यूजी और पीजी प्रोग्राम दोनों के लिए फीस का ढांचा तय कर दिया गया है. किसी भी तकनीकी संस्थान में यूजी यानि अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम में दाखिले के लिए फीस स्लैब बना दिया गया है. इस स्लैब में 80 हजार से लेकर एक लाख 90 हजार तक की सीमा रखी गई है. इसी सीमा के भीतर सभी कॉलेज फीस ले पाएंगे. वहीं पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम के पहले साल में दाखिले के लिए 1 लाख 40 हजार से सवा 3 लाख रुपये तक की स्लैब को मंजूरी दी गई है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तय किए गए फीस के इस दायरे से अलग अब कोई भी संस्थान फीस नहीं वसूल पाएगा.
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि दाखिले के बाद आगे के वर्षों में कॉलेज परिसर में मौजूद सुविधाओं के आधार पर फीस में कुछ बढ़ोत्तरी कर सकते हैं. हालांकि फीस में बढ़ोत्तरी कॉलेज की ओर से शिक्षकों को दिया जाने वाला वेतन, कॉलेज इन्फ्रास्ट्रक्चर, सीटें, कोर्स, कम्प्यूटर लैब आदि सुविधाओं के आधार पर ही की जा सकेगी. इस फैसले के चलते छात्रों को बड़ा लाभ होने वाला है. देशभर में एक जैसा फीस स्ट्रक्चर रहने से छात्रों को किसी भी कॉलेज में पढ़ने की सुविधा रहेगी.
गौरतलब है कि अभी तक देशभर के अलग-अलग राज्यों में इंजीनियरिंग, फार्मेसी या अन्य तकनीकी संस्थानों की फीस अलग-अलग है. फीस को लेकर कोई तय नियम न होने के चलते कई बार शिकायतें भी मिली हैं कि कॉलेज मनमाने ढंग से फीस की वसूली कर रहे हैं. इस दौरान देश में यूजी और पीजी कोर्सेज में दाखिले के दौरान डेढ़ लाख से 10 लाख तक की फीस वसूली जा रही थी. हालांकि अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत इस पर लगाम लगाने की तैयारी की गई है.
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