राज्यों से ऐसी ही उम्मीद है! 10 साल में तमिलनाडु होगा हरा-भरा, लगाए जाएंगे 260 करोड़ पौधे

चेन्नई. तमिलनाडु को हरा भरा बनाने के लिए राज्य सरकार ने 10 साल का लक्ष्य तय किया है. इस दौरान राज्य के जंगलों को 23.6 फीसद से बढ़ाकर 33 फीसद तक लाने का लक्ष्य रखा गया है. सामने आई खबर के मुताबिक मिशन के निदेशक और अतिरिक्त प्रमुख वन संरक्षक दीपक श्रीवास्तव का कहना है कि अब तक लोग अपनी-अपनी क्षमता के हिसाब से अलग-अलग पौधे लगाते हैं. अब हमारी योजना है कि हम उन सभी लोगों और विभागों के प्रयासों को एक साथ मिलाकर काम करेंगे.
श्रीवास्तव ने कहा कि इस मिशन के तहत एनजीओ, सरकारी संस्थान और निजी स्तर पर पौधे लगाने वालों को शामिल किया जाएगा. इस योजना का मकसद होगा कि सभी लोग तमिलनाडु में हरियाली को बढ़ाने के लिए एक टीम की तरह काम करें. योजना के तहत अगले 10 सालों में 260 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है. इन पौधों को जंगल के बाहर वाले इलाकों में लगाया जाएगा. इसके तहत इस साल के अंत तक करीब 2.5 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे.
रोजगार और आजीविका से भी जुड़ेंगे लोग
तमिलनाडु के अतिरिक्त प्रमुख वन संरक्षक दीपक श्रीवास्तव ने कहा कि खास बात ये है कि इस योजना का उद्देश्य महज पौधे लगाना नहीं है. रोजगार और आजीविका से जोड़ने के साथ ही जलवायु परिवर्तन को रोकना भी इसका लक्ष्य है. वन विभाग का कहना है कि इसके लिए मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स को इसके आर्थिक पहलू के अध्ययन के लिए शामिल किया जाएगा. योजना के तहत पहले आदिवासियों और अन्य वनवासियों के सहयोग से 11000 वर्ग किमी. के क्षेत्र में घटते वन क्षेत्रों में पौधे लगाए जाएंगे.
इसके बाद शहरी क्षेत्र की ओर रूख किया जाएगा. सरकार ने इस साल के अंत तक 2.5 करोड़ पौधों को लगाने के लिए एनजीओ, सरकारी संस्थानों और निजी क्षेत्रों को भी जोडने की योजना तैयार की है. दरअसल सरकार इसे एक आंदोलन की तरह खड़ा करना चाहती है. जिससे आम आदमी की इसमें हिस्सेदारी हो सके. यही नहीं हर साल 5 लाख पौधे मुफ्त वितरित करने की योजना भी तैयार की जा रही है.
सरकार ने इसके लिए जिला स्तर पर हरित समिति के निर्माण की योजना बनाई है. जंगल के बाहरी क्षेत्रों में जो भी पौधे लगाए जाएंगे, उसके लिए राज्य सरकार हरित समीति को आर्थिक मदद मुहैया कराएगी. इस समिति में जिला कलेक्टर, जिला वन अधिकारी, स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि, सेना और पुलिस के लोगों को शामिल किया जाएगा. इसके अलावा हरित समिति विभिन्न हितधारकों का चयन करके वन विभाग में नर्सरी बढ़ाने में भी सहयोग करेगी. यही नहीं पेड़ों को काटने या प्रत्यारोपण की अनुमति देने का अधिकार भी समिति के पास होगा. इसके अलावा पौधों के लगाने से लेकर मिट्टी और कार्बन डेटा का डेटाबेस भी समिति ही तैयार करेगी.
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