क्यों दोस्ती की बात करता चीन अब पाकिस्तान में सेना भेजने की धमकी दे रहा है?

क्या हो रहा पाकिस्तान में
पाकिस्तान को आएदिन अपने ही हिस्से के लोगों का विद्रोह झेलना पड़ रहा है. यहां तक कि अब चीन का पाकिस्तान में खरबों डॉलर का निवेश खतरे में आ चुका है. इसका आखिरकार खामियाजा पाकिस्तान को ही भुगतना पड़ सकता है. दरअसल हो ये रहा है कि दशकों से पाकिस्तान से अलग खुद को आजाद देश के तौर पर बनाए जाने की मांग कर रहे बलूच विद्रोहियों की मांग अब हिंसक हो चुकी है.
अपना रहे अलग रणनीति
हिंसा के लिए भी बलूच सीधे पाकिस्तानी सेना पर ही हमला नहीं कर रहे, बल्कि छांट-छांटकर उन हिस्सों पर हमला कर रहे हैं, जहां चीन का कोई बड़ा निवेश हुआ है और कोई सड़क या पुल तैयार हो रहा है. बलूच निर्माण स्थल पर सामान पहुंचने में भी रुकावट डाल रहे हैं. पिछले कुछ सालों में ये हमला बढ़े हैं.

बलूच लड़ाके पाकिस्तान से आजादी के लिए चीन को टारगेट कर रहे हैं- सांकेतिक फोटो (news18 English via Reuters)
चीन के पैसे खतरे में
ताजा हमले के बाद एक बार फिर से चीन का बलूचिस्तान के ग्वादर पोर्ट और फ्री ट्रेड जोन में अरबों डॉलर का निवेश संकट में आ चुका है. बता दें कि पाक में चीन 60 अरब डॉलर से अधिक का निवेश कर चुका है. इसके अलावा गुप्त ढंग से उसने पाक को भारी भरकम कर्ज दिए हैं, वो अलग हैं. दुनिया के सामने पाक से दोस्ती की बात करता चीन चाहकर भी कुछ कर नहीं पा रहा. वजह, बलूच विद्रोह पाकिस्तान का आंतरिक मुद्दा है.
बलूचिस्तान क्यों अलग होना चाहता है?
बलूच लोगों का मानना है कि भारत से अलग होने के बाद पाकिस्तान ने सिंध और पंजाब प्रातों का तो विकास किया लेकिन बलूचिस्तान पर कभी ध्यान नहीं दिया. नतीजा ये रहा कि बलूच शिक्षा, रोजगार और हेल्थ तक में काफी पीछे रहे. यही देखते हुए सत्तर के दशक में बलूच आजादी की मांग काफी तेज हो गई.

बलूचिस्तान पाकिस्तान पर अपने विकास पर ध्यान न देने का आरोप लगाता है- सांकेतिक फोटो
बलूचों के साथ हुई थी हिंसा
इसे दबाने के लिए पाकिस्तान की तत्कालीन भुट्टो सरकार ने आक्रामक तरीका अपनाया. पाक सेना वहां आम बलूच नागरिकों को भी मारने लगी. अनुमान है कि सेना और बलूच लड़ाकों के बीच हुए संघर्ष में साल 1973 में लगभग 8 हजार बलूच नागरिक-लड़ाकों की मौत हो गई थी. वहीं पाकिस्तान के करीब 500 सैनिक मारे गए. इसके बाद मामला खुले तौर पर तो ठंडा पड़ गया लेकिन बलूच लोगों के भीतर गुस्सा भड़कता गया.
बलूच लड़ाके अब क्या कर रहे हैं
अब आजादी के लिए वहां गुरिल्ला हमले का रास्ता अपनाया जा रहा है. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) बलोच अलगाववादियों का सबसे बड़ा संगठन है. ये लगातार पाक पर बलूचिस्तान को अलग करने की मांग करता आया है. इसके अलावा कई और भी अलगाववादी संगठन हैं जो बलूच आजादी के लिए लोगों को एकजुट कर रहे हैं. वे पाकिस्तान से आजादी के लिए चीन को टारगेट कर रहे हैं.

चीनियों में असुरक्षा लाकर बलूच लड़ाके इमरान सरकार पर दबाव बनाना चाह रहे हैं- सांकेतिक फोटो (flickr)
चीनियों के ठहरने की जगह तक बन चुकी टारगेट
साल 2019 में ग्वादर के एकमात्र पांच-सितारा होटल पर्ल कॉन्टिनेंट पर बलूच विद्रोहियों ने हमला कर दिया था. बता दें कि इस होटल में चीन से इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम के लिए आए अधिकारी ही ठहरते आए हैं. साथ ही उन्होंने धमकी दी कि वे CPEC प्रोजेक्ट पूरा नहीं होने देंगे. इससे ये समझ आता है कि पाकिस्तान में चीनी सुरक्षित नहीं. यही यकीन दिलाना दशकों से आजादी मांग रहे विद्रोहियों का मकसद है ताकि वे किसी भी तरह से पाक सरकार पर अपनी आजादी के लिए दबाव बना सकें.
मानवाधिकारों को लेकर कशमकश
इमरान सरकार पहले से ही भारी कर्ज में दबी हुई है. ऐसे में वो किसी हाल में चीन का साथ नहीं छोड़ना चाहती. जिनपिंग को खुश करने के लिए वो अपने ही लोगों यानी बलूच विद्रोहियों और साथ ही बलूचिस्तान प्रांत के आम लोगों पर भी हिंसा कर रही है. मानवाधिकारों के मामले में पहले ही उइगरों पर हिंसा को लेकर चीन घेरे में है. ऐसे में वो बलूचिस्तानियों पर सीधी कार्रवाई से बचता आ रहा है. हालांकि ताजा हमले के बाद उसने पाकिस्तान को चेतावनी दे डाली कि अगर वो अपने यहां विद्रोह नहीं संभाल सकता तो चीनी सेना वहां पहुंच जाएगी. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के जरिए ये चेतावनी सामने आई.
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